कक्षा 9 वीं वार्षिक परीक्षा 2025
सेट – 943
विषय : सामाजिक विज्ञान
निर्देश :
1. सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
2. प्रश्न क्रमांक 1 से 5 तक वस्तुनिष्ठ प्रश्न हैं। जिनके
लिए 1
x 30 = 30
अंक निर्धारित हैं।
3. प्रश्न क्रमांक 6 से 23 तक प्रत्येक में आंतरिक विकल्प
दिये गये हैं।
4. प्रश्न क्रमांक 6 से 17 तक प्रत्येक प्रश्न 2 अंक का है। उत्तर लिखने की शब्द
सीमा अधिकतम 30 शब्द है।
5. प्रश्न क्रमांक 18 से 20 तक प्रत्येक प्रश्न 3 अंक का है। उत्तर लिखने की शब्द
सीमा अधिकतम 75 शब्द है।
6. प्रश्न क्रमांक 21 से 23 तक प्रत्येक प्रश्न 4 अंक का है। उत्तर लिखने की शब्द
सीमा अधिकतम 120 शब्द है।
7. प्रश्न क्रमांक 23 मानचित्र आधारित प्रश्न है।
प्रादर्श उत्तर
प्रश्न.1निम्नलिखित विकल्पों में से सही
विकल्प का चयन कर लिखिए - (1x6=6)
(i) भारत के मध्य से गुजरने वाली
कर्क रेखा का मान कितना है ?
(अ) 82030' पूर्व
देशान्तर (ब) 97025' पूर्व देशान्तर
(स) 23030' उत्तरी अक्षांश (द)
6807' पूर्व देशान्तर
उत्तर - (स) 23030' उत्तरी अक्षांश
(ii) भारत की सबसे लम्बी तट रेखा वाला
राज्य कौन सा है ?
(अ) मध्यप्रदेश (ब) गुजरात
(स) गोवा (द) केरल
उत्तर - (ब) गुजरात
(iii) जैकोबिन क्लब का लीडर कौन था -
(अ) रूसो (ब)
कार्ल मार्क्स
(स) नेपोलियन (द) रोबेस्पेयर
उत्तर - (द) रोबेस्पेयर
(iv) किस देश की संसद को ड्यूमा कहा
जाता है?
(अ) फ़्रांस (ब)
रूस
(स) इंग्लैंड (द)
जर्मनी
उत्तर - (ब) रूस
(v) भारतीय संसद के कितने सदन हैं?
(अ) चार (ब)
तीन
(स) दो
(द) एक
उत्तर - (स) दो
(vi) करीम ने पालमपुर में कौन सा
केंद्र खोला?
(अ) कंप्यूटर (ब) सिलाई
(स) ब्यूटी पार्लर
(द) गुड की दुकान
उत्तर - (अ) कंप्यूटर
प्रश्न 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (1x6=6)
(i) ‘मानसून’ शब्द की व्युत्पत्ति अरबी भाषा के
..................मौसिम................................... शब्द
से हुई।
(ii) रूस में संपन्न किसानों को ......................कूलक.............................. कहा जाता था।
(iii) ‘संविधान सभा’ के अध्यक्ष ........डॉ
राजेन्द्र प्रसाद ........ थे।
(iv) भारत का संविधान अपने नागरिकों
को ...........06 ......... मौलिक
अधिकार प्रदान करता है।
(v) भारत में व्यस्क मताधिकार की
उम्र ...........18 वर्ष............. है।
(vi) भारत में खाद्य सुरक्षा अधिनियम सन .......2013 ........... में लागू किया गया।
प्रश्न 3 सत्य/असत्य लिखिए - (1x6=6)
i.ग्रीष्म ऋतु में उत्तरी मैदान में बहने वाली पवन को व्यापारिक पवनें कहते हैं।
उत्तर – असत्य
ii. एक निश्चित
समयांतराल में जनसँख्या की अधिकारिक गणना ‘जनसँख्या’ कहलाती है।
उत्तर – सत्य
iii. सन 1914 में
रूस पर ज़ार निकोलस का शासन था।
उत्तर – सत्य
iv. हिटलर ने
बर्लिन में आत्महत्या की थी।
उत्तर – सत्य
v. भारतीय वन
अधिनियम 1865 में लागू किया गया।
उत्तर – सत्य
vi. बेरोजगारी से
जनशक्ति संसाधन की बर्बादी होती है।
उत्तर – सत्य
प्रश्न. 4 सही जोड़ियां बनाइये- (1x6=6)
सूची (अ) सूची (ब)
i. भारत अ. दिसम्बर,1946
ii. मेंग्रोव वन ब. छोटा नागपुर
iii. जनसँख्या नीति स. गुप्तचर राज्य पुलिस
iv. गेस्तापो द. तटवर्ती क्षेत्र
v. बिरसा मुंडा इ.
एशिया
vi. संविधान सभा फ. सन 2020
उत्तर –
सूची (अ) सूची (ब)
i. भारत इ. एशिया
ii. मेंग्रोव वन द. तटवर्ती क्षेत्र
iii. जनसँख्या नीति फ. सन 2020
iv. गेस्तापो स. गुप्तचर राज्य
पुलिस
v. बिरसा मुंडा ब. छोटा नागपुर
vi. संविधान सभा अ. दिसम्बर,1946
प्रश्न. 5 एक वाक्य में उत्तर
लिखिये - (1x6=6)
(i)
विश्व का सबसे बड़ा नदीय द्वीप कौन सा है?
उत्तर – माजुली
द्वीप।
(ii)
एस्टेट जनरल की बैठक कहाँ हुई थी?
उत्तर – वर्साय के
असेंबली हाल में।
(iii) “दास कैपिटल” किसकी रचना है ?
उत्तर – कार्ल
मार्क्स।
(iv) हिटलर ने जिस विचारधारा को जन्म
दिया उसे क्या कहते हैं?
उत्तर - नाज़ीवाद।
(v) पंथ निरपेक्षता का क्या अर्थ है?
उत्तर – नागरिकों को
किसी भी धर्म को मानने की पूरी स्वतंत्रता होना और राज्य का कोई अधिकारिक धर्म न होना ही पंथ
निरपेक्षता है ।
(vi) भारत में निर्धनता रेखा का आकलन
किस संस्था द्वारा किया जाता है?
उत्तर – राष्ट्रीय
प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन द्वारा।
उत्तर- भारत का अक्षांशीय विस्तार 8° 4' उत्तर से 37° 6' उत्तर तक है और देशांतरीय विस्तार 68° 7' पूर्व से 97° 25' पूर्व तक है ।
अथवा
भारत के पडौसी देशों के नाम लिखिए ।
उत्तर- पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल. भूटान, म्यांमार, चीन, अफगानिस्तान,मालदीप, श्रीलंका ।
प्र.7- दोआब किसे कहते है ? 2
उत्तर- . दोआब शब्द, 'दो' और 'आब' (यानी 'पानी') शब्दों से मिलकर बना है । दोआब का मतलब है, दो नदियों के बीच की ज़मीन ।
अथवा
प्रायद्वीप क्या है ?
उत्तर- प्रायद्वीप एक ऐसा भूभाग है जो तीन तरफ़ से पानी से
और एक तरफ़ से ज़मीन से घिरा होता है । भारतीय प्रायद्वीप पश्चिम में अरब सागर, पूर्व में बंगाल की खाड़ी और दक्षिण में
हिंद महासागर से घिरा हुआ है।।
प्र.8- दक्षिण भारत की दो मुख्य नदियों के
नाम लिखिए । 2
उत्तर- गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, महानदी, नर्मदा, ताप्ती, तुंगभद्रा
अथवा
नदियों के प्रदूषण कम करने के कोई
दो उपाय लिखिए ।
नदी प्रदूषण रोकने के उपाय
1.
उद्योगों का अपशिष्ट नदियों में नहीं बहाना चाहिए।
2.
नदियों में मूर्ती विसर्जन नहीं करना चाहिए।
3. नदियों में किसी भी प्रकार की सामग्री पोलीथिन में बंद करके नहीं फेंकना चाहिए।
4.
नदी जीवों का शिकार नहीं करना चाहिए।
5.
जल शुद्धिकारण यंत्र लगाये जाने चाहिए।
6. नदीयों की सुरक्षा हेतु बनाये गए नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए।
प्र.9- मौसम और जलवायु में अंतर लिखिए । 2
उत्तर- एक विशाल इलाके में एक लंबी समयावधि (30 वर्ष से अधिक) में मौसम की अवस्थाओं तथा
विविधताओं का कुल योग ही जलवायु है ।
मौसम एक विशेष समय में एक क्षेत्र के
वायुमंडल की स्थिति को बताता है।
अथवा
भारत की जलवायु को प्रभावित करने
वाले दो कारकों को लिखिए ।
उत्तर- भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक
निम्नलिखित हैं -
अक्षांश - अक्षांश पर किसी भी
देश की स्थिति का प्रभाव जलवायु पर पड़ता है।
ऊँचाई - ऊँचाई के बढ़ने पर
तापमान में कमी होती जाती है।
समुद्र से दूरी - समुद्र से दूर होने पर
विषम जलवायु तथा निकट होने पर सम जलवायु होती है।
महासागरीय धारायें - गर्म महासागरीय धाराओं
के प्रभाव के कारण जलवायु सम और ठंडी धाराओं के कारण जलवायु विषम होती है।
वायुदाब - किसी भी क्षेत्र का
वायुदाब उस स्थान के अक्षांश तथा ऊँचाई पर निर्भर करता है।
प्र.10- अक्षत वनस्पति किसे कहते हैं? 2
उत्तर- जो वनस्पति बिना मानव हस्तक्षेप के अपने
आप पैदा होती है, उसे अक्षत वनस्पति कहते हैं ।
अथवा
वनों से होने वाले दो लाभ लिखिए ।
उत्तर- वनों से होने वाले
लाभ निम्नलिखित हैं :-
1. वन वायुमण्डल को शुद्ध रखते हैं और वायु
प्रदूषण को कम करते हैं।
2. वन वायुमण्डल को ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।
3. वन वायु के तापमान को बनाये रखते हैं, जिससे वर्षा होती है।
4. वन जलवायु को सम रखते हैं।
5. वन जल के बहाव को रोकते हैं, जिससे भूमि का कटाव रुक जाता है तथा भूगर्भीय जल-स्तर में वृद्धि होती है।
प्र.11- मृत्यु दर किसे कहते हैं? 2
उत्तर- किसी निश्चित समय में प्रति 1,000 लोगों पर किसी जनसंख्या
में होने वाली मौतों की संख्या को मृत्यु दर कहते हैं।
मृत्यु दर निकालने का तरीका:
·
किसी निश्चित समय में कुल जनसंख्या में हुई मौतों की संख्या को निकालें।
·
इस संख्या को 1,000 से गुणा करें।
·
यह संख्या जनसंख्या में प्रति 1,000 लोगों पर मौतों की संख्या बताएगी।
अथवा
जनसँख्या वितरण को प्रभावित करने वाले दो कारक लिखिए ।
उत्तर- जनसँख्या वितरण को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं –
भौगोलिक कारक – इसके
अंतर्गत स्थलाकृति जैसे मैदान, पर्वत और पठार तथा तराई आदि क्षेत्र आते हैं ।
जलवायु – जलवायु की
समता और विषमता भी जनसँख्या वितरण को प्रभावित करती है ।
पानी–पानी की सहज
उपलब्धता से जनसँख्या वितरण प्रभावित होता है ।
इसके अलावा
सांस्कृतिक कारक , सामाजिक कारक और आर्थिक कारक भी जनसँख्या वितरण को प्रभावित
करते हैं ।
प्र.12- टोंग्यो खेती किसे कहते हैं? 2
उत्तर – टोंग्या खेती एक ऐसी व्यवस्था थी
जहाँ किसानों को कुछ समय के लिए बागानों में ही खेती करने की आज़ादी थी । अर्थात टोंग्या खेती, वन विभाग और किसानों के बीच एक व्यवस्था
है । इसमें एक ही ज़मीन पर कृषि और वन वृक्षों की खेती एक साथ की जाती है । इसे टोंग्या प्रणाली भी कहा जाता है ।
अथवा
घुमंतू खेती किसे कहते हैं ?
उत्तर – घुमंतू खेती के लिए जंगल के कुछ
भागों को बारी – बरी से काटा और जलाया जाता है । मानसून की पहली बारिश के बाद इसकी
राख में बीज बो दिए जाते हैं जौर उगने वाली फसल को अक्टूबर – नवम्बर में कटा जाता
है । 1 या 2 साल खेती करके खेतों को 12
से 18 साल के लिए खाली छोड़ दिया जाता है । ताकि यहाँ फिर से जंगल उग आये ।
प्र.13- मसाई समुदाय से उसके चारागाह छिन
जाने के दो कारण लिखिए । 2
उत्तर – मसाई समुदाय से उसके चारागाह छिन
जाने के कारण –
1. 1885 में मसाईलैंड को दो भागों में विभाजित कर देना ।
2. बेहतरीन चरागाहों को आबादी बस्ती बसने औपनिवेशिक
सरकार ने कब्जे में ले लिए ।
3.
मसाईयों को एक छोटे से इलाके तक सीमित कर देना ।
4. अफ्रीका में खेती के प्रसार को प्रोत्साहित करना ।
5. बहुत सारे चरागाहों को शिकारगाहों में बदल देना ।
6. सेरेंग्ती नेशनल पार्क के लिए मसाईयों के चरागाहों
वाली जमीं पर कब्ज़ा कर लेना ।
अथवा
रायका समुदाय का जीवन यापन कैसा था
?
उत्तर – राजस्थान के रेगिस्तान में रायका समुदाय
रहता था । जहां बारिश का कोई भरोसा नहीं था, खेती की उपज हर साल कम ज्यादा होती रहती
थी । इसी कारण राय का खेती के साथ-साथ चरवाही का काम भी करते थे बरसात में
बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर और बीकानेर के रायका अपने गांव में ही रहते थे लेकिन अक्टूबर में जब
चारागाह सूखने लगते तो यह नए चारागाह की तलाश में चल पड़ते थे और अगली बरसात में
ही घर आते थे रायकाओं का एक तबका ऊँट पालता था जबकि कुछ भेड़ बकरियां पालते थे।
प्र.14- लोकतंत्र की दो मुख्य विशेषताएं
लिखिए । 2
उत्तर – लोकतंत्र की विशेषताएँ निम्न है :-
(1) लोकतंत्र
में निष्पक्ष एवं स्वतंत्र रूप से चुनाव होते है जिसमें जनता अपने प्रतिनिधि को
चुनती है।
(2) चुनाव
द्वारा लोग जब चाहे मौजूदा शासकों को बदल सकते है।
(3) इसमें सभी
नागरिकों को सार्वभौमिक व्यस्क मताधिकार प्राप्त होता है।
(4) इसमें सरकार
कानून या संविधान के द्वारा चलाया जाता है।
अथवा
गैर – लोकतान्त्रिक सरकारों के कोई दो दोष
लिखिए।
उत्तर – गैर –
लोकतान्त्रिक सरकारों के दोष निम्नलिखित हैं –
1. जनता
द्वारा नहीं चुनी जाती है। यह मूवेबल मेटल टाइप किताब है ।
2. लोगों को
मौलिक अधिकार प्राप्त नहीं होते हैं।
3. नियत
अंतराल में चुनाव नहीं होते न ही जनता के पास सरकार बदलने का कोई विकल्प होता है।
4. सरकार
शासक के इच्छानुसार कार्य करती है।
5. अलोकतांत्रिक
सरकार में शासक समूह ही प्रमुख होता है।
प्र.15- निर्वाचन क्षेत्र किसे कहते हैं? 2
उत्तर – निर्वाचन क्षेत्र एक भौगोलिक क्षेत्र होता
है जिसे चुनाव के लिए विभाजित किया जाता है। इसमें इस क्षेत्र के
रहने वाले मतदाता अपने प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र से एक प्रतिनिधि चुनते हैं। भारत में कुल 543संसदीय निर्वाचन
क्षेत्र हैं।
अथवा
मतदाता सूची से क्या आशय है ?
उत्तर – लोकतान्त्रिक
चुनाव में मतदान की योग्यता रखने वालों की सूची काफी पहले तैयार कर लि जाती है और
हर किसी को दे दी जाती है । इसी सूची को अधिकारिक रूप से मतदाता सूची कहते हैं ।
प्र.16- पालमपुर में बिजली प्रसार ने
किसानों की किस तरह मदद की ? लिखिए । 2
उत्तर – पालमपुर में बिजली के प्रसार ने किसानों की निम्न रूप से
सहायता की :-
1. कृषि उपकरण, जैसे हार्वेस्टर, थ्रेशर आदि ने किसानों की सहायता की है।
2. बिजली का उपयोग गाँव में प्रकाश के लिए भी किया गया।
3. विद्युत प्रकाश, पंखे, प्रेस एवं मशीनों ने किसानों के घरेलू कार्यों में सहायता
दी है।
4. सिंचाई की उपयुक्त विधि, नलकूपों एवं पंपिंग सेटों को बिजली द्वारा चलाया जाता है।
5. बिजली से सिंचाई प्रणाली में सुधार के कारण किसान पूरे वर्ष
के दौरान विभिन्न फसलें उगा सकते थे।
6. उन्हें मानसून की बरसात पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है
जो कि अनिश्चित है।
अथवा
पालमपुर में कौन – कौन सी गैर –
कृषि क्रियाएं होती हैं?
उत्तर - पालमपुर गांव की प्रमुख तीन गैर कृषि
क्रियाएं -
i) लघु स्तरीय
विनिर्माण
ii) डेयरी
iii) परिवहन
iv) दुकानदारी
प्र.17- बफर स्टॉक क्या है? 2
उत्तर – बफर स्टॉक भारतीय खाद्य निगम के माध्यम से
सरकार द्वारा अधिप्राप्त अनाज, गेहूं और चावल का भंडार है । अर्थात बफ़र स्टॉक, किसी वस्तु की कमी को पूरा करने के लिए भविष्य में उसका भंडार तैयार करना
है । इसे सुरक्षा स्टॉक भी कहा जाता है ।
अथवा
अन्त्योदय अन्न योजना की दो विशेषताएं लिखिए ।
उत्तर – अन्त्योदय
अन्न योजना की विशेषताएं निम्नलिखित हैं –
1. गरीबों में भी सर्वाधिक गरीब समूहों को खाद्य सुरक्षा
उपलब्ध कराना ।
2. इस योजना के माध्यम
से इस समूह को 2 रु किलो गेहूँ और 3 रु किलो चावल प्रदान किया जाता है ।
3. इस समूह के प्रत्येक परिवार को 35 किलोग्राम अनाज
उपलब्ध कराया जाता है ।
4. इस योजना के अंतर्गत 2 करोड़ लोग लाभ ले रहे हैं ।
प्र.18- स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव को
विस्तार से समझाइए । 3
उत्तर – स्वतंत्र और
निष्पक्ष चुनाव :- लोकतंत्र निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनावों पर
आधरित होना चाहिए ताकि सत्ता में बैठे लोगों के लिए जीत और हार के सामान अवसर हों । लोकतंत्र में केवल चुनाव कराना ही पर्याप्त नहीं होता है
। चुनाव में एक से ज्यादा असली राजनैतिक विकल्पों के बीच चुनने की स्थिति होना
चाहिए । लोगों के पास यह विकल्प रहना चाहिए कि वे चाहें तो शासक दल को गद्दी से
उतार दें । इस तरह एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव में राजनीतिक
स्वतंत्रता और मतदान तक
की निष्पक्ष प्रक्रियाएँ , मतदान करने वाले योग्य मतदाताओं की
निष्पक्ष गणना, चुनावी धोखाधड़ी या मतदाता
दमन की
कमी और सभी दलों द्वारा चुनाव परिणामों की स्वीकृति शामिल है।
अथवा
लोकतंत्र में चुनावों की जरुरत
क्यों है?
कोई तीन कारण लिखिए ।
उत्तर - हमें निम्नलिखित कारणों से चुनाव की आवश्यकता
है –
(i) अधिकांश लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्थाओं में लोग अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से
शासन करते हैं।
(ii) बिना चुनाव के हम किसी भी लोकतंत्र की कल्पना नहीं कर सकते हैं।
(iii) लोकतंत्र की बहाली के लिए चुनाव की आवश्यकता होती है।
(iv) लोग चुनाव के माध्यम से लोग अपने प्रतिनिधियों
को चुनते है।
(v) चुनाव के माध्यम से हम किसी भी सरकार को बदल
सकते है।
(vi) हम चुनाव इसलिए करते है ताकि चुने हुए
प्रतिनिधि संसद से कानून बना सके।
(vii) चुनाव से हमें सही और मनपसंद प्रतिनिधि और सरकार
चुन सकते है।
प्र.19- राष्ट्रीय मानव आयोग के तीन कार्य
लिखिए । 3
उत्तर - राष्ट्रीय मानव
अधिकार आयोग की स्थापना 12 अक्टूबर, 1993 को हुई थी. यह आयोग
देश में मानवाधिकारों का संरक्षक है. यह संविधान द्वारा गारंटीकृत और अंतरराष्ट्रीय संधियों में शामिल
व्यक्तिगत अधिकारों का संरक्षक है। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के मुख्य कार्य
ये हैं:
·
मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े मामलों की जांच करना।
·
मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े न्यायिक मामलों में हस्तक्षेप करना।
·
जेलों का दौरा करके बंदियों की स्थिति का निरीक्षण करना।
· संविधान और कानून में मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए किए गए प्रावधानों की
समीक्षा करना।
·
मानवाधिकारों के क्षेत्र में शोध करना।
·
मानवाधिकारों से जुड़ी जानकारी का प्रचार करना।
·
लोगों को मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए उठाए जाने वाले कदमों के बारे में
बताना।
·
दीवानी अदालत की तरह के फ़ैसले लेना।
·
अंतरिम राहत देना।
·
मुआवज़े या हर्जाने की सिफ़ारिश करना।
·
मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को
सिफ़ारिशें करना।
अथवा
सूचना का अधिकार क्या है? आम जनता को इस अधिकार से क्या लाभ
हुआ?
उत्तर-
सूचना का अधिकार (आरटीआई) एक कानून है जिसके तहत आम नागरिक सरकारी विभागों से
जानकारी हासिल कर सकते हैं। इस कानून का मकसद सरकार की कामकाजी में पारदर्शिता लाना
और भ्रष्टाचार को कम करना है।
आम जनता को सूचना का अधिकार से ये फ़ायदे हुए
हैं:
·
सरकार की कामकाजी में पारदर्शिता बढ़ी है।
·
भ्रष्टाचार कम हुआ है।
·
सरकार की जवाबदेही बढ़ी है।
·
लोगों को सरकार की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिली है।
·
लोगों की रोज़मर्रा की समस्याएं सुलझी हैं।
प्र.20-
मानव पूँजी निर्माण में शिक्षा की
क्या भूमिका है? 3
उत्तर - मानव पूंजी निर्माण में शिक्षा की
भूमिका निम्नलिखित है -
1. कौशल विकास
शिक्षा नए कौशल और ज्ञान प्राप्त करने का
प्राथमिक साधन है। बचपन की प्रारंभिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा और उससे आगे तक, व्यक्ति कई तरह के कौशल और
विषय सीखते हैं जो उनके व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास के लिए आवश्यक हैं। इन
कौशलों में संज्ञानात्मक क्षमताएँ और व्यावहारिक कौशल दोनों शामिल हैं।
2. ज्ञान संचय
शिक्षा केवल कौशल प्राप्त करने तक ही सीमित
नहीं है, बल्कि इसमें ज्ञान का संचय
भी शामिल है। गणित और विज्ञान से लेकर साहित्य और इतिहास तक, शिक्षा व्यक्तियों को ज्ञान के व्यापक आधार से लैस करती है जो उन्हें
सूचित निर्णय लेने और समाज में योगदान करने में सक्षम बनाती है।
3. उत्पादकता बढ़ाना
जब लोग शिक्षा और प्रशिक्षण प्राप्त
करते हैं, तो वे अधिक उत्पादक कर्मचारी बन जाते हैं। वे अपने
ज्ञान और कौशल को अपने काम में लागू कर सकते हैं, जिससे उनकी
कार्यकुशलता और प्रभावशीलता बढ़ जाती है। उत्पादकता में यह सुधार न केवल
व्यक्तियों को बल्कि उनके नियोक्ताओं और समग्र अर्थव्यवस्था को भी लाभ पहुंचाता
है।
4. आर्थिक विकास
शिक्षा आर्थिक विकास के पीछे एक प्रेरक शक्ति
है। अच्छी तरह से शिक्षित आबादी वाले राष्ट्रों में आर्थिक विकास के उच्च स्तर का
अनुभव होता है। जब आबादी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा शिक्षित होता है, तो वे प्रौद्योगिकी और
नवाचार से लेकर स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा तक अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों
में योगदान दे सकते हैं। इससे आर्थिक उत्पादन में वृद्धि होती है, जीवन स्तर में सुधार होता है और गरीबी कम होती है।
5. सामाजिक गतिशीलता
शिक्षा को अक्सर समाज में समानता लाने वाला
महान साधन माना जाता है। यह व्यक्तियों को अपनी सामाजिक-आर्थिक स्थिति सुधारने और
ऊपर की ओर गतिशीलता प्राप्त करने के अवसर प्रदान करती है। शिक्षा विविध पृष्ठभूमि
के लोगों को बेहतर नौकरी के अवसर और उच्च आय स्तर तक पहुँचने में सक्षम बनाती है।
6. नवाचार और अनुकूलनशीलता
नवाचार और अनुकूलनशीलता व्यक्तियों और समाजों
दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। शिक्षा रचनात्मकता और नई चुनौतियों के
अनुकूल होने की क्षमता को बढ़ावा देती है। यह आलोचनात्मक सोच, समस्या-समाधान और विकास की मानसिकता को प्रोत्साहित करती है, जो सभी जटिल मुद्दों को संबोधित करने और प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए
आवश्यक हैं।
7. वैश्विक प्रतिस्पर्धा
आज की वैश्वीकृत दुनिया में, राष्ट्रों को अंतर्राष्ट्रीय
मंच पर प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए। एक सुशिक्षित कार्यबल किसी देश की
प्रतिस्पर्धात्मकता में एक महत्वपूर्ण कारक है। अत्यधिक कुशल और जानकार व्यक्ति
वैश्विक अर्थव्यवस्था में भाग लेने, विदेशी निवेश को आकर्षित
करने और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में शामिल होने के लिए बेहतर ढंग से सुसज्जित हैं।
निष्कर्ष
संक्षेप में, आप समझ गए होंगे कि मानव पूंजी निर्माण में
शिक्षा की क्या भूमिका है। शिक्षा निस्संदेह मानव पूंजी निर्माण की आधारशिला है। यह व्यक्तियों को तेजी से
विकसित हो रही दुनिया में सफल होने के लिए आवश्यक कौशल, ज्ञान
और मानसिकता से लैस करती है। इसके अलावा, शिक्षा न केवल
व्यक्तियों के लिए बल्कि पूरे समाज और अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी फायदेमंद है। यह
आर्थिक विकास में योगदान देता है, असमानता को कम करता है,
नवाचार को बढ़ावा देता है और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ाता है।
अथवा
अर्थव्यवस्था के तीन क्षेत्रकों का
उदाहरण सहित वर्णन कीजिये ।
उत्तर - भारतीय अर्थव्यवस्था के तीन क्षेत्रक
निम्नलिखित हैं -
1. प्राथमिक क्षेत्र - अर्थव्यवस्था का वह क्षेत्र जहाँ प्राकृतिक संसाधनों को कच्चे तौर
पर प्राप्त किया जाता है; यथा-उत्खनन, कृषि कार्य, पशुपालन, मछली पालन, इत्यादि।
इसी क्षेत्रक को कृषि एवं संबध्द गतिविधियाँ (Agriculture and
allied activities) भी कहा जाता है।
2.
द्वितीयक क्षेत्र - अर्थव्यवस्था का
वह क्षेत्र जो प्राथमिक क्षेत्र के उत्पादों को अपनी गतिविधियों में कच्चे माल (Raw Material) की तरह उपयोग करता है द्वितीयक क्षेत्र कहलाता है। उदाहरण के लिए
लौह एवं इस्पात उद्योग, वस्त्र
उद्योग, वाहन, बिस्किट, केक
इत्यादि उद्योग। वास्तव में इस क्षेत्रक में विनिर्माण (Manufacturing) कार्य होता है यही कारण है कि इसे औद्योगिक क्षेत्रक भी कहा जाता
है।
2. तृतीयक क्षेत्र -यह क्षेत्र किसी भी तरह की
वस्तु का उत्पादन नहीं करता बल्कि वस्तु उत्पादन में सहायता उपलब्ध करता है । इस क्षेत्रक में विभिन्न प्रकार की सेवाओं का उत्पादन किया जाता है; यथा-बैंकिंग, बीमा, शिक्षा, चिकित्सा, पर्यटन इत्यादि। इस क्षेत्र को सेवा क्षेत्र के रूप में भी जाना
जाता है।
इस क्षेत्र का उदाहरण सभी सेवा क्षेत्र हैं
जिसमें आईटी सेवाएं, परामर्श आदि शामिल हैं।
प्र.21- भारत में निर्धनता के चार प्रमुख
कारणों का वर्णन कीजिये । 4
उत्तर - निर्धनता - निर्धनता वह स्थिति या स्तर है जहाँ
व्यक्ति की आय इतनी कम हो जाती है कि वह अपनी आधारभूत आवष्यकताओं को भी पूरा करने में
असमर्थ हो जाता है।
भारत में निर्धनता के कारण निम्नलिखित हैं :-
1. अशिक्षा
:- भारत में सन 2011 की जनगणना के अनुसार, अब तक जनसंख्या का केवल 73प्रतिशत
भाग ही
साक्षर है, इस प्रतिशत में वे व्यक्ति भी सम्मिलित है जो मामूली रूप से
लिख पढ़ सकते हैं। भारत में पुरुषों की साक्षरता दर 80.9 प्रतिशत है, वहीं महिलाओं
में साक्षरता दर केवल 64.6प्र तिशत है। महिलाओं
में कम साक्षरता का कारण परिवार और आबादी की जानकारी कमी है। जो कि भारत में निर्धनता
के कारण में प्रधान कारण है।
2. उद्योगों
की कमी :- भारत में आदमी का प्रमुख उद्योग शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित है। ग्रामीण
क्षेत्रों में उद्योगों का उचित विकास नहीं हुआ है, जिस कारणवश वहां पर बेरोजगारी में वृद्धि होती
है।
3. सामाजिक
कारण :- देश में गरीबी के लिए जाति प्रथा, संयुक्त परिवार प्रथा, उत्तराधिकार
के नियम, शिक्षा व मानव
कल्याण के प्रति उदासीनता आज के अनेक कारण हैं, जो गरीबों को और गरीब बना रहे हैं।
4. प्रौद्योगिकी
का निम्न स्तर :- कृषि तथा विनिर्माण क्षेत्र में परंपरागत उत्पादन तकनीकों ने प्रति
व्यक्ति उत्पादकता के स्तर को नीचा बनाए रखा है, जिसके कारण गरीबी और अधिक गहन हुई है।
5. श्रम
की मांग और पूर्ति में असंतुलन :- जब श्रमिकों की मांग कम होती है और उनकी पूर्ति बढ़
जाती है। तो समस्त श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध नहीं हो पाता और इस कारण बेरोजगारी मे
वृद्धि होती है। भारत में मजदूरों की अधिक संख्या में उपलब्धता भी निर्धनता का प्रमुख
कारण है।
6. जनसंख्या
में तीव्र वृद्धि :- भारत की जनसंख्या में तीव्र वृद्धि हुई है, जिससे गरीबी
एवं बेरोजगारी की समस्या की गंभीरता और बढ़ गई है। 2.5प्रतिशत वार्षिक वृद्धि की दर
से जनसंख्या का बढ़ना ग्रामीण श्रम पूर्ति की तीव्रता में वृद्धि करता है। श्रमिकों
की संख्या में जो तीव्रता से वृद्धि हो रही है, उसके अनुरूप रोजगार सुविधाएं नहीं बढ़ पाती हैं।
7. प्राकृतिक
प्रकोप :- हमारी अर्थव्यवस्था प्रकृति पर बहुत अधिक निर्भर है। प्राकृतिक प्रकोपो का
सामना करने के पर्याप्त साधनों का ना होना भी हमारी निर्धनता का एक प्रमुख कारण है।
8. तकनीकी
प्रशिक्षण :- रोजगार सुविधाओं को व्यापक रूप से उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक है कि तकनीकी
प्रशिक्षण का कार्यक्रम अपनाया जाए। भारत में निर्धनता का यह एक प्रमुख कारण है।
9. ग्रामीण
ऋणग्रस्तता :- आय में कमी होने के कारण भारतीय कृषक दैनिक जीवन ऋण लेकर व्यतीत करता
है। वह ऋण अदा करने के लिए फसल पर निर्भर रहता है, लेकिन यदि प्राकृतिक प्रकोप या किसी अन्य समस्या
से उसकी फसल में नुकसान होता है तो वहां ऋण से ग्रसित हो जाता है। जिससे निर्धनता आ
जाती है।
10. आर्थिक कारण :- निर्धनता का संबंध आर्थिक
पहलुओं से भी है, आर्थिक दशा का वर्णन आय और व्यय के संबंध में
किया जाता है। अपर्याप्त उत्पादन असमान वितरण आर्थिक उच्च वचन निर्धनता एवं बेरोजगारी
आदि को जन्म देता है। भारत में उत्पादन के लिए परंपरागत साधनों का प्रयोग किया जाता
है जिसके कारण यहां पर्याप्त उत्पादन नहीं हो पाता है।
अथवा
भारत में निर्धनता दूर करने के कोई
चार प्रमुख कार्यक्रमों का वर्णन कीजिये
।
उत्तर – निर्धनता या गरीबी एक बहुआयामी समस्या
है जिसका समाधान सरल एवं सहज नहीं हैं। सच में तो गरीबी को पूरी तरह से दूर करना असम्भव
सा है। लेकिन निर्धनता को कम किया जा सकता है। गरीबी हटाने के लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित
उपाय को अपनाना श्रेयस्कर होगाः
1. जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण- बढ़ती हुई परिवार
की संख्या के कारण परिवार की आर्थिक हालत बहुत खराब हो जाती है यदि इस पर नियंत्रण
हो जाये तो परिवार की स्थिति को सुधारा भी जा सकता है।
2. रोजगार के अवसर में वृद्धि- निर्धनता का एक
मुख्य कारण रोजगार के अवसर की कमी है। यदि रोजगारों के अवसर में वृद्धि की जायें तो
लोगों के जीवन स्तर में सुधार आयेगा और उनकी आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी जिससे वे अपने
बच्चों की बुनियादी अवष्यकताओं पूरी कर पायेंगे जिससे बालक विकास में वृद्धि होगी।
3. व्यक्तिगत एवं सामाजिक मूल्यों में परिवर्तन-
भारत में परम्परागत रूप से अलग -अलग धर्म एवं जाति के लोग रहते हैं और उनके अलग-अलग
व्यक्तिगत एवं सामाजिक मूल्य निर्धारित होते हैं। जैसे- बाह्यण जाति के लिए निम्न जाति
के लोगों से सेवा कराना, श्रमिक का काम कराना। इसी प्रकार निम्न जाति के
लोगों को उच्च कार्य वर्णित थे। इन सभी मूल्यों में परिवर्तन आवश्यक है। इनमें परिवर्तन
होने से लोगों के सामाजिक मूल्य ऊँचे उठते हैं जिनसे इनका जीवन स्तर उच्च होता है।
4. शिक्षा- शिक्षा किसी बात की अभिव्यक्ति का
सशक्त माध्यम है शिक्षा से व्यक्ति की सोच विकसित होती है और वह अपने अधिकारों के प्रति
जागरूक होते हैं लेकिन अशिक्षित लोगों का हमेशा शोषण होता रहा है। इसलिए यदि गरीब लोग
शिक्षित होंगे तो कोई भी उनका शोषण नहीं कर पायेगा और जो वो मेहनत करते हैं तो उन्हें
उनका पूरा भुगतान मिलेगा जिससे वे अपने बच्चों को सुख-सुविधा दे पायेंगे और शिक्षित
होने से माता-पिता गरीब होने के बावजूद भी अपने बच्चों को शिक्षित कर उन्हें समाज में
स्थान दिला पायेंगे।
5. आय का पुनर्वितरण - आय और धन के वितरण की असमानता
गरीबी को स्थायी बना देती है। यह नागरिकों की कार्यकुशलता को भी विपरीत रूप से प्रभावित
करती है। जब देश की अर्थव्यवस्था का ढांचा इस प्रकार का हो कि विकास के प्रयत्नों के
कारण बढ़ी हुई आय को अमीर लोग ही हड़प जाते हों तो विकास के सारे प्रयत्न ही बेकार हो
जाते हैं। ऐसी स्थिति मे गरीबी घटने की बजाय और अधिक बढ़ जाती है। भारत में बहुत कुछ
हद तक ऐसा ही हो रहा है। अतः यहां गरीबी उन्मूलन के लिए आय इस प्रकार पुनर्वितरण कराना
आवश्यक है जिससे गरीब वर्ग की आय व उपभोग का स्तर ऊंचा उठ सके। इसके लिए राष्ट्रीय
साधन, सम्पत्ति एवं
आय के प्रवाह को अमीरों से गरीबों की ओर मोड़ना होगा।
6. विकास की ऊंची दर - गरीबी उन्मूलन के लिए आय
का पुनर्वितरण, जनसंख्या नियन्त्रण आदि उपायों का महत्व है, किन्तु इनकी
कुछ सीमाएं हैं। अतः यह आवश्यक है कि गरीबी के स्थायी उपचार हेतु आर्थिक विकास की दर
बढ़ाने पर ही सर्वाधिक ध्यान देना होगा। यद्यपि आय के पुनर्वितरण के द्वारा वर्तमान
वस्तुओं आपस में बंटवारा तो सम्भव है। किन्तु देश की वस्तुओं के कुल भंडारों में वृद्धि
करने के लिए तो उत्पादन में वृद्धि करनी होगी। अतः भारत में गरीबी-उन्मूलन की दृष्टि
से तीव्र आर्थिक विकास सर्वप्रथम अनिवार्य शर्त हैं तीव्र आर्थिक विकास के लिए हमें
उत्पादकता एवं कार्यकुशलता बढ़ाने, तकनीकी ज्ञान के स्तर में सुधार लाने, देश के मानवीय
व प्राकृतिक साधनों का पूरा-पूरा उपयोग करने जैसे उपाय करने होंगे।
7. कृषि का विकास - भारत मूल रूप से एक कृषि प्रधान
देश है और भारत की खेती पिछड़ी हुई है। भारत में गरीबों का काफी बड़ा भाग कृषि क्षेत्र
में ही पाया जाता है। अतः कृषि के विकास पर ध्यान देना प्रथम प्राथमिकता होना चाहिए।
भूमिहीन किसानों व सीमान्त किसानों की स्थिति में सुधार लाने हेतु विशेष प्रयास किये
जाने चाहिए। ग्रामीण क्षेत्र की गरीबी को दूर करने के लिए भूमि का पुनर्वितरण भी काफी
उपयोगी उपाय है।
8. कुटीर व लघु उद्योगों का विकास - भारत में
बेरोजगार लोगों को रोजगार प्रदान करने की दृष्टि से कुटीर व लघु उद्योगों का विकास
किया जाना आवश्यक है। इससे न केवल बेरोजगार गरीब लोगों को काम मिलेगा वरन् आय व असमानता
भी घटेगी।
9. सामाजिक भागीदारी - यदि गरीब लोग विकास के
कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी प्रारम्भ कर दे तो गरीबी को दूर किया जाना सरल हो
जाएगा। इसके लिए गरीबों को स्वयं को गरीबी-उन्मूलन और आर्थिक विकास के कार्यक्रमों
में शामिल करना होगा। इस कार्य में पंचायती राज संस्थानों, स्वैच्छिक संगठनों
और स्व-सहायता समूहों की भागीदारी को बढ़ाना आवश्यक होगा।
10. छिपी हई बेरोजगारी की समाप्ति और रोजगार में
वृद्धि - निर्धनता दूर करने के लिए रोजगार, अर्द्ध रोजगार तथा छिपी हुई बेरोजगारी को दूर
करने के लिए विशेष प्रयत्न किये जाने आवश्यक हैं। ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने
के अधिक अवसर हैं उनका पूरा लाभ उठाना चाहिए। कृषि का विकास करके भूमि पर एक से अधिक
फसल उगाने के फलस्वरूप अर्द्ध बेरोजगारी तथा छिपी बेरोजगारी को कम किया जा सकता है।
ग्रामीण क्षेत्र में कुटीर उद्योग, निर्माण आदि के कार्यों का विकास किया जाना चाहिए।
शहरों में लघु उद्योग, यातायात आदि का अधिक विकास किया जाना चाहिए। शिक्षा
की प्रणाली में परिवर्तन करके शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार प्रदान किया जाना चाहिए।
11. उत्पादन की तकनीकों में परिवर्तन - भारतीय
अर्थव्यवस्था में इस प्रकार का तकनीकी विकास करना चाहिए जिससे श्रम का पूरा उपयेग हो
सके। वास्तव में, भारत के लिए मध्यम तकनीकें, जो श्रम प्रधान
तथा पूंजी प्रधान तकनीकों के मध्य का मार्ग हैं, अपनाई जानी चाहिए। इसके फलस्वरूप रोजगार की मात्रा
बढे़गी तथा निर्धनता को दूर किया जा सकेगा।
12. पिछड़े क्षेत्रों पर विशेष ध्यान - भारत में
कुछ क्षेत्र जैसे उड़ीसा, नागालैंड, उत्तर प्रदेश, बिहार आदि में आज भी निर्धनों का अनुपात दूसरे
प्रदेशों से अधिक है। सरकार को पिछड़े इलाकों में विशेष सुविधायें प्रदान करनी चाहिए
जिससे निजी पूंजी उन प्रदेशों में निवेश किया जाना सम्भव हो सकें। इसके लिए सार्वजनिक
क्षेत्रों का भी विकास किया जाना चाहिए।
13. न्यूनतम आवश्यकताओं की सन्तुष्टि - सरकार
को निर्धनों की न्यूनतम आवश्यकताओं जैसे पीने का पानी, प्राथमिक चिकित्सा, प्राथमिक शिक्षा
आदि को सन्तुष्ट करने के प्रयत्न करने चाहिए। इसके लिए यदि सरकार को अधिक से अधिक राशि
व्यय करनी पडे़ तो कोई बुराई नहीं है।
14. निर्धनों की उत्पादकता में वृद्धि - डॉ. वी.के.आर.वी.राव
के अनुसार निर्धनता को दूर करने के लिए निर्धनों की आर्थिक उत्पादकता को बढ़ाना आवश्यक
है। निर्धनों को स्वयं सतर्क होकर रोजगार की अवस्था को प्राप्त करने के प्रयत्न करने
चाहिए। सरकार को इसके लिए सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्रों में अधिक निवेश करना चाहिए।
निर्धन वर्ग को रोजगार विन्मुख प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए तथा उनकी उत्पादकता बढ़ाने
के प्रयत्न किये जाने चाहिए।
प्र.22- भारत की संसद के चार मुख्य कार्य लिखिए । 4
उत्तर - भारतीय संसद के प्रमुख कार्य ये हैं:
·
कानून बनाना
·
बजट पारित करना
·
लोक शिकायतों को सुनवाई करना
·
देश के प्रशासन की देखभाल करना
·
सरकार की कार्यप्रणाली पर निगरानी रखना
·
राष्ट्रीय नीतियों और विकास योजनाओं पर चर्चा करना
·
अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर चर्चा करना
·
देश के मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करना
·
संविधान में संशोधन करना
·
राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेना
उपरोक्त में
से किन्हीं चार कारणों का वर्णन किया जा सकता है।
अथवा
भारत के प्रधानमंत्री की चार शक्तियों का वर्णन
कीजिये ।
उत्तर - प्रधानमंत्री के शक्तियाँ निम्नलिखित
हैं :-
मंत्रीपरिषद के संबंध में प्रधानमंत्री की शक्तियां
1. मंत्रीपरिषद
की बैठक को बुलाना तथा आयोजित बैठक की अध्यक्षता करना।
2. मंत्रियों
के लिए मंत्रालय निर्धारित करना।
3. मंत्रियों
के माध्यम से होने वाले विकास कार्यों का नेतृत्व करना।
राष्ट्रपति के संबंध में प्रधानमंत्री की शक्तियां
1. राष्ट्रपति
को सलाह देना (मंत्रियों की नियुक्ति आदि में)
2. तत्कालीन
योजनाओं एवं विकास कार्यों के बारे में राष्ट्रपति को अवगत कराना /सूचित करना।
संसद के संबंध में शक्तियां
1. प्रधानमंत्री
सम्पूर्ण मंत्रीपरिषद का प्रमुख होता है।
2. राष्ट्रपति
को लोकसभा के विघटन के लिए सलाह देना
3. संसद
में सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं।
4. संसद
में जनता के सवालों का जवाब देते हैं।
प्रधानमंत्री के अन्य कार्य
1. नीति
(NITI) आयोग के अध्यक्ष प्रधानमंत्री
होते हैं।
2. अंतर्राज्यीय
परिषद के अध्यक्ष
3. राष्ट्रीय
एकता परिषद
4. ऐसे
ही अन्य कई परिषद हैं जिनकी अध्यक्षता का दायित्व प्रधानमंत्री का होता है।
प्र.23- निम्नलिखित को भारत के मानचित्र में अंकित कीजिए - 4
i. छोटा नागपुर का पठार
ii. नर्मदा नदी
iii. मालाबार तट
iv. सतपुड़ा श्रेणी
अथवा
i. थार मरुस्थल
ii. अरावली श्रेणी
iii. कोरोमंडल तट
iv. लक्षदीप समूह
शुभकामनायें
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